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poetry on mother in hindi ★ माँ के लिए कवितायें और शायरी |

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यू तो बचपन से मेरी माँ ने मुझे हँसना सिखाया था
पर रोना ऐ जिंदगी तूने मुझे शिखाया है
मेरी माँ के जाने के बाद ऐ जिंदगी तूने अपना असली रंग दिखाया है

मेरे बचपन से ही मेरी हंसी मेरी खुसी सबसे प्यारी थी मेरी माँ को
ये सब छीन कर भी तूने मुझे जीना शिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है

जिस लड़की को बिना डरे उसकी माँ ने जिना शिखाया था
गलत के खिलाफ आवाज उठाना उसकी माँ ने सिखाया था
आज उसके गलत  देखते हुए भी चुप रहना तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है

बचपन मे मेरी माँ मेरी एक आवाज से मेरी हर ख्वाहिश पूरी कर जाती थी
आज अपने ख्वाहिशो की दबाना मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद मुझे तूने अपना असली रंग दिखाया है

यू तो बिना खाये सोने नही देती थी मेरी माँ मुझे
आज बिना खाये मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने मुझे अपना असली रंग दिखाया है


रिस्तो की कीमत बचपन से ही सिखाई थी मेरी माँ ने मुझे
पर उन रिस्तो को छोटी उमर में निभाना तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है

अक्सर जब मैं अपने माँ से गुस्सा हो जाया करती थी तो मेरी माँ ने मुझे बढे प्यार से मनाया करती थी
आज जब मैं गुस्सा हो जाती हूं तो खुद की ही कोस जाती हूं
कमरे में जाकर रोती हूं और खुद को ही चुप कराती हूं
ये हुनर भी मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद मुझे तूने अपना असली रंग दिखाया है

अक्सर मैं जब काम से थक कर घर आती थी
तो मेरी माँ मेरे लिए खाना बनाती थी
और मैं उस खाने में भी नखरे दिखाती थी
आज जब मैं थक कर आती हूं तो खुद ही खाना बनाती हूं
वो जला भी होतो चुप चाप खाती हूं ये हुनर भी मुझे तूने सिखाया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने मुझे अपना असली रंग दिखाया है

हाँ ये सच है की मेरी माँ ने मुझे बहोत कुछ सिखाया था
पर मुझे मेरी जिंदगी का असली मलतब माँ के जाने के बाद समझ आया है
ऐ जिंदगी मेरी माँ के जाने के बाद तूने अपना असली रंग दिखाया है

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याद जब भी आती है माँ तेरी
याद जब भी आती है माँ तेरी…
मैं बस चाँद को देख लेता हूं
तू मुझे दिखे या ना दिखे मैं तुझे देख लेता हूं

मेहेशे नाकाम इश्क़ नही
मेहेशे नाकाम इश्क़ नही …
मेरी बर्बादियों के मंजर है बहोत से
माँ रो देगी मुझे यू देख इसलिए मैं घर नही जाता
माँ रो देगी मुझे यू देख बस यही सोच मैं घर नही जाता
और शायर युही नही बना मै अगर वो दामन ना छोड़ते तो मैं निखर नही पाता

कैसे हार मान जाँऊ मैं उन तकलीफो से
मेरी तरक्की के आस में
की कैसे हार मान जाऊँ मैं उन तकलीफो से
तरक्की के आस में मेरी माँ आज भी कब से आस लगा बैठी है

तुम क्या जानो की माँ क्या होती है
माँ हमारी जमीं और आसमाँ होती है ..
जब जरूरत पड़ती है हमें बून्द की
तो अपने छाती से वो हमें समुन्दर पिलाती है
और जरूरत पर वो खुद भूखे सो जाती है

तुम क्या जानो की माँ क्या होती है
यही माँ कभी तुम्हे सर्वंन बनाती है
यही माँ कभी तुम्हे मोहम्मन बनाती है
लेकिन माँ खुद माँ ही रह जाती है
तुम क्या जानो की माँ क्या होती है

माँ ना होती तो ये जमीं आसमाँ ना होता
अगर माँ ना होती तो ये जमीन और आसमान ना होता
माँ ना होती तो ये सारा जहांन ना होता

माँ नाम की गजब तलब लगी थी उसे भी लगी कई जबरदस्त प्यास
उठायी कलम लिख डाली दस्ता
लगता था माँ मेरी बैठी थी उदाश

मैने देखी है इस जालिम दुनिया को दुख की घड़ी में मांगती है मन्नत
अरे माँ की सेवा कर ले मेरे दोस्त तुम्हे जीते जी मिल जाएगी जन्नत

जब जब मैं इस जालिम दुनिया को देखता हूं …
मेरा भी मन करता है बन जाऊं धांशू
पर माँ तेरा आँचल वो याद आता है
बस तूने ही तो पोछे थे मेरे आँशु

माँ परदेश में नौकरी करता हूं ..
माँ परदेश में नौकरी करता हूं याद आती है तेरी
पास होकर भी दूर हूं तुझसे यही है
यही तो मजबूरी है मेरी

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मेरी माँ खुदा करें आंखे तेरी नम ना हो …
मेरी माँ खुदा करें आंखे तेरी कभी हम ना हो जिस राह पे तू चले उस राह पे कभी कोई गम ना हो
आये दुख की घड़ी जिस दिन तेरे पे ….
खुदा करे उस दिन इस दुनिया मे हम ना हो

अजब गजब की दुनिया देखी और देखे दुनिया वाले …
मेरे राहो में तो आँगारे बोये थे
पर मेरी माँ के आशीर्वाद से ना पड़ सके मेरे पाँव में छाले

साहब जिसकी माँ नही होती …
साहब जिसकी माँ नही होती उससे पूछो क्या होती है माँ की ममता
आज तूने मुझे इस काबिल बनाया वर्ना मेरे में कहॉ थी इतनी क्षमता

मेरे बुरे वक्त को देख मेरे दोस्तों ने भी साथ छोड़ दिया
और वो मेरी माँ की दुआ है
जिसने बुरे वक्त का भी रुख मोड़ दिया

जो खुदा है उसे खुदा कहता हूं
वो मेरे घर मे रहता है उसे माँ कहता हूं
जो कपड़ा मुझे छाँव देता है मुझे धूप से
उसी आँचल को मैं आसमाँ कहता हूं

तेरा गुरुर उन्ही बांतो से है जो अक्षर कभी पढ़ना सिखाये
तेरी सेहत उसी पोषन से है जो फल फूल कभी उसने खिलाये
यू तो माँ का अर्ज हर भाषा मे समान है लेकिन माँ का असली

भावार्थ किसी उपन्यास में नही आज जो तू पैरो पर अपने दीवाने सा और करे उसका अपमान है तू करे उसकी त्याग का परमान ये उसकी किस्मत में नही
का उस मासूम अनाथ से मिल तू उसकी दिल मे माँ की तस्वीर पायेगा

और जब तू अपनी माँ की आखिरी शब्द सुनेगा मान या ना मान आँशु तेरे भी आएंगे
पैरो से जमीन तेरे भी निकल जाएंगे
और जब यहशास तू इसका पाएगा कहां जाएगा

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बांतों में मेरी तेरी बात अब भी बाकी है बिगड़ा नही है जिंदगी का गीत साज अब भी बाकी है
टूटा नही है साथ का सपना वो खूब सूरत रात अब भी बाकी है सुनते हैं जिक्र तेरा दूसरों से पर मिलन की आस अब भी बाकी है
मंजिल नही है पर निशान बाकी है बिछड़े हुए अरसा हो गया दिल मे एहसास अब भी बाकी है खो दिया है खुद को पर तुझे पाने की प्यास बाकी है
मिट गई है रूह तेरी बेवफाई से फिर भी वफ़ा पर विस्वास बाकी है
कितना भी समझाले खुद को की भूल गए हैं तुझको पर अब भी मुझमें तू ही तू बाकी है तू ही बाकी हैं
माना करती होगी मोहब्बत वो तुझसे पर तड़पाना उसे मेरी इक गुमनाम रिस्ते में रख कर
फिर बतलाना कितनी उसकी मोहब्बत बाकी है

फिर से किस्मत आजमाना बाकी है तेरे ही शहर में घर बसाना बाकी है मिला था दर्द जिस शहर में जहाँ दिल टूटा था
मिला था दर्द जिस शहर में उसी से अब दिल लगाना बाकी है
पर इन सब जजबातो के बाद खुद्दारी अब भी बाकी है गिरा कर खुद को तेरे प्यार में फिर से उठाना बाकी है
तेरा वापस आना और मेरा ना पलट कर देखना तो बाकी है

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नमक चीनी के अंदाजों में गुजरने वाली है जिंदगी
नमक चीनी के अंदाजों में गुजरने वाली है जिंदगी पर तुम चाहो तो इससे मुझे बचा सकते हो थोड़ा कम ज्यादा जो जाए अगर तो क्या खा सकते हो
गुस्से में भी मुस्कुराओ रूठो खुद पर मुझे मनाओ
हाँ थोड़ा अजिंब है लेकिन क्या ऐसा प्यार जता सकते हो
मुझे आदत है बेवजह नाराज हो जाने की
क्या तुम बेवजह मना सकते हो
और कागज कलम की आगोज में ही गुजर जाते है कई बार राते मेरी पर नींदों के साथ मेरा रिस्ता गहेरा है
तो क्या तुम मेरी ख्वाबो की बस्ती पर और सजा सकते हो
आलार्म बन्द कर मेरी नींदे बढ़ा सकते हो
और सुना है सुबह की पहली  किरणों के साथ जगा करना पड़ेगा मुझको
चाय नास्ता और बर्तन बहोत कुछ करना पड़ेगा मुझको
तुम मुझपर थोड़ा तरस तो खा सकते हो पर क्या कभी कभी काम मे भी हाथ बटा सकते हो
और जाने अनजाने में शरारतो के बहाने में हो जाती है कई बार गलतिया मुझसे पर तुम चाहो तो इन्हें छिपा सकते हो
कई बार मेरी गलतियों का इल्जाम खुद पर लगा सकते हो
और ना चांद तांरो की ख्वाहिश मुझे और ना ही चाहिए मुझे कोई हिंरो के हार
चॉकलेट टैडी के नाम ही मुझे अच्छे लगते है तो क्या है ऐसा जिससे तुम जूझे खुस करा सकते हो
डोसा पसन्द है मुझे बहोत तुम वो खिला सकते हो
और डिडियलजी देखी मैने ना ही कुछ कुछ होता है
हूँ वीर जारा की दीवानी मैं तो सोचती हूँ
क्या इक पायल के सहारे जिंदगी तुम भी बिता सकते हो
हाँ शायद ये मुमकिन नहीं पर क्या तुम वीर की तरह मुझे चाह सकते हो
और हाँ जानती हूँ मै आसान नहीं होता ये इश्क कभी दरिया है ये आग का तो क्या अपनी बन कभी इसे पार कर आ सकते हो

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कास कोई तो ऐसा हो जो सिर्फ मेरा हो ...
कास कोई तो ऐसा हो जो सिर्फ मेरा हो ना वो चाँद जैसा ना हो ताँरो जैसा
उसके जैसी हो जाऊं मैं और वो हो जाए मेरे जैसा
ख़यालो में मेरे खोता हो सोचकर मुझे कुछ होता हो
मेरे नाम से उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हो सावल करो दिल और आंखे जवाब दी जाती हो
जाते वक्त पलट कर वो भी मुझे देखता हो
सरारत भारी निगाहों से रूह को मेरी छेड़ता हो और
महज मेरा नाम सुनकर ही वो महक जाता हो
जितना उसको चाहती हूँ मैं कास वो भी मुझे उतना चाहता हो

Love Poem Hindi Me

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गलती मेरी ना होने पर भी माफी अक्सर मैं ही मांग लिया करती thi
गलती मेरी ना होने पर भी माफी अक्सर मैं ही मांग लिया करती थी  मैं खुद को नाराज कर उन्हें मनालिया करती थी
की तेरे मैसेज का इंतजार करते रहना तेरे नाम से मेरे फ़ोन जब रिंग बजे तो साथ ही मेरे दिल का जोरो से धड़कना
गुजरो जब भी तुम इन आंखों से सामने से तो नजरे तुमपर आकर ही रुक जाना
तुम्हारा मेरे देख के मुस्कुरा जाने से मानो मेरे दिल का था बन जाना
तुम्हारे चेहरे की उदासी मुझे देखकर मेरे दिल का तुमसे बात करने के लिए तड़पना

हाँ सायद मुझे भी तुमसे प्यार था पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते थे

क्योंकि हर छोटी छोटी बातों को पूरे ध्यान से सुनना
उनकी कहि गयी मुझसे प्यार भरी लाइन को दिन सौ बार रटना
और जब फिर उनका ये कह देने से की तुम मुझे नही समझते
तुम मेरे प्यार को नही समझते तुझसे कहना तो बहोत कुछ चाहता था ये दिल उनसे पर
फिर ये सोच कर की कही उन्हें कुछ दर्द ना पहोच जाए
अक्सर अपने जजबातो को दिल मे बसा लिया करती थी
हाँ सायद मैं भी उनसे प्यार करती थी
पर वैसा नही जैसे वो किये करते थे

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अब कुछ इस कदर वो हमसे प्यार किया करते थे

पास आने तक नही देते थे पर दूर भी कहा जाने देते थे
वो मानते थे की हाँ माना मैं अक्सर रुठ कर चला जाया करता हूँ
क्युकी मुझे मनाने का तुम्हारा तरीका बेहद पसंद है  हाँ माना मैं अक्सर रुठ कर चला जाया करता हूँ क्योंकि मुझे रोकने का तुम्हारा तरीका बेहद पसंद है
अक्सर बेखयाली में मैं भी तुम्हारा ख्याल किया करता हूँ… जब मेरा भी दिल तुमसे बात करने के लिए तड़पता है लेकिन फिर ये सोच कर की तुम ही मुझे याद कर लोगी
अपने दिल को कही और मशरूफ कर लेता हूँ पर सायद मैं भी तुमसे प्यार किया करता हूँ
हाँ पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते हो

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की मुझे भी तुम्हारी फिक्र सताती है …
मुझे भी तुम्हारी फिक्र सताती है पर मैं फिक्र जता नही पाता हूँ पर तुम मुझसे दिल मत लगा बैठना …
तुम मुझसे दिल मत लगा बैठना दिल फेक आशिक हूँ मैं दिल तुम्हारा टूट ही जायेगा क्योकि ऐसी फिक्र मैं सभी के लिए जताता हूँ
पर हो सके तो मुझे कभी छोड़ कर मत जाना क्योकि मुझे तुम्हारी जरूरत है और आखिर कल मुझे ऐसा प्यार करने वाला कहाँ मिलेगा हाँ शायद मैं भी तुमसे प्यार किया करता हूँ
हाँ पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते हो

हिंदी कविताएं

ये गम क्या दिल की आदत है – Nhi To
किसी से कुछ शिकायत है -नही तो
किसी के बिन किसी के याद के बिन जीने की हिम्मत है – नही तो
किसी सूरत पर अब दिल नही लगता हाँ
तो क्या कुछ दिनों से ये हालत है – नही तो
वो तुझे वफ़ा की उम्मीदें देकर तुझसे बेवफा हो गया तो क्या अब तेरा भी वफ़ा से भरोसा उठ गया – नही तो
वो रात तुम्हे गमो के अंधेरो में अकेला छोड़ किसी और के बाहों में सो गया
तो क्या अब उसकी रातो को उजाड़ने की तमन्ना है – नही तो
तो क्या अब भी उसकी खुशियो की दुआओं में उसकी सजदों में सर झुकाया करती हो – हाँ
तो क्या अब भी उसके वापस लौटने का इंतजार करती हो – नही तो
तो भीर उसे भुला कर उसे फिर मानकर उससे प्यार करने की चाहत है -नही तो

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Dosti Poem – heart touching poem on friendship_poems

 

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Love poems in hindi – love shayari | Heart touching love poetry| romantik poem

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जो मुरझा जाए फूल इक दफा ।
जो मुरझा जाए फूल इक दफा तो लाख पानी डालने पर कहा खिलता है ये जिस्म बॉटने वाले तो हर गली और चौराहे पर है कोई ये बताओ ये दुख और दर्द बॉटने वाला कहा मिलता है

बाते अब जो प्यार से नही होती बता कोई रुसवाई है क्या ।।
बाते अब जो प्यार से नही होती बता कोई रुसवाई है क्या . एक के बाद एक दिल पर जख्म दिए जा रहा तो सुन तू कोई कसाई है क्या

बस पल दो पल नही हर साथ साथ चलूंगी …
बस पल दो पल नही हर साथ साथ चलूंगी मैं रौशनी की कुछ खास चाह नही मुझे हर अँधेयार साथ चलूंगी मैं कोई दरिया जो मिल गया तो ठीक है वर्ना हर प्यास साथ चलूंगी मै

रास्ते लम्बे तय करने हैं ना तुझे ….
रास्ते लम्बे तय करने हैं ना तुझे हो मुस्किल या आसान साथ चलूंगी मै जन्नत तो देखली मैने जो देखनी थी अब हर समशान साथ चलूंगी मैं
विदेश के सपने मैंने देखकर छोड़ दिया जाना ।।

विदेश के सपने मैंने देखकर छोड़ दिया जाना तेरा घर है ना वहाँ तो ठीक है प्रयागराज साथ चलूंगी मैं तू खुशियॉ दे देना तोड़ी सी हमे फिर देखना हर वनवास साथ चलूंगी मैं
बस पल दो पल नही हर साथ साथ चलूंगी मै

इक वक्त था …इक वक्त था जब लगता था तेरे होने से हर रात सुहानी पर अब तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है वफादार बना बैठा है तू दुनिया की नजरों में पर अब मैने भी

हर महफिल में तेरी ही बेवफाई सुनानी है की तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है तू रखना अपनी अकड़ तराजू के पलड़े पर दूसरे पर मै अपनी मेहनत रख दूँगी

क्यू की जो तेरी दो कौड़ी की अकड़ है ना अभी मिट्टी में मिलानी है
की तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है तुझे अब भी लगता है की तुझपे मरती हूँ मैं अब दिल से नही जाना दिमाग से फैसले करती हूं मैं

बहोत सी गलत फैमिया जो दूर करनी है बहोत सी बातें हैं जो तुझे समझानी है की तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है
अब मुझे फरक नही पड़ता …
की अब मुझे फरक नही पड़ता तू कसम खा या जहर तेरी सेहत की चिंता होती थी मुझे अब वो बात बित जाना बहोत पुरानी है कि तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है

अब देख तुझे औरो कि बाहो में दिल मेरा रोता नही है ..
अब देख तुझे औरो कि बाहो में दिल मेरा रोता नही है अब चिंता नही मुझे की क्यू तू चैन से सोता नही है क्युकी इन सब चीजों से ऊपर उठ चुकी हूँ मै तेरी जगह अपनी कलम को चुन चुकी हूँ मै और अब इस कलम से मुझे मेरी इक पहचान बनानी है की तू जरा ठहर तुझे तेरी औकात दिखानी है

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तेरे इन्तजार में मेरे सभ्य का धागा ना झूट जाए ।।
तेरे इन्तजार में मेरे सभ्य का धागा ना झूट जाए और तब तुम मत आना जब सास ही छूट जाए मत पूछ अजनबी इस दिल को दुखाने वाले का नाम बड़ा दुखता है ये दिल जब लेता है उसका नाम

की अब तक इन निगाहों को कोई भाया नही ..
अब तक इन निगाहों को कोई भाया ही नही जो भाया वो हमारा हुआ भी नही और हर बार तो कह चुकी थी उसकी बेरुखी उन्हें हमसे मोहब्बत ही नही फिर भी हमको उन्ही से मोहब्बत  और दिल तो हमारा भी कह चुका था तुम इस मोहब्बत के काबिल नही फिर भी हमे जिद थी तुम्ही से दिल लगाने की

कितना अजब सा मंजर था मेरी जिंदगी के सफर का
कितना अजब सा मंजर था मेरी जिंदगी के सफर का मुझे वहां ठहरने का इरादा था जहा मंजिल करीब नही

प्यार में मिली एक Bewfa से सौगात लिखनी है …
प्यार में मिली एक बेवफा से सौगात लिखनी है जिन लोगो के दिलो में भी दिमाग है मुझे उनकी औकात लिखनी है

अब किस दील से तुझे बद्दुआ दू ।
अब किस दील से तुझे बद्दुआ दू दिल मे भी तू है सब नफरत में भी शामिल हो गया ।
अरे कुछ तो शर्म कर कितना भरोशा करती है ।।
अरे कुछ तो शर्म कर कितना भरोशा करती है तुझपे तू अपने मतलब के लिए क्या किसी से बात कर लेगा

खुद से नजर ना मिला पाऊँ ।
खुद से नजर ना मिला पाऊँ कुछ ऐसा कायर बना दिया और घर वालो से इतना झूठ बोल की लायर बना दिया आज मैं यहा हूँ तेरी इश्क की वजह से कंबख्त तेरी इश्क़ ने शायर बना दिया
वो फिर एक बार गहेरो की इश्क़ में ढल रहा है ..
वो फिर एक बार गहेरो की इश्क़ में ढल रहा है ये तो पुरानी आदत है कौन कहता है बदल रहा है सदमा सा लगा है मुझे लगता है फिर कुछ जल रहा है बे इंतहा इश्क़ है मुझसे ऐसा हमारा गुजरा कल रहा है

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कुछ सवाल पूछ लू क्या उससे ।।
कुछ सवाल पूछ लू क्या मैं उससे खैर छोड़ो कहानी बताएगा सौ कसमे खायेगा मुझे लगेगा फिर सम्भल रहा है
और मुखे लगेगा फिर सम्भल रहा है मगर निहायती बेशर्म है देखो झूठ बोलकर कैसे उछल रहा है रँगे हाथ पकड़ा है मैंने जहा जहा तेरा इश्क़ चल रहा है

तेरे बदलते रंग ना समझू इतनी जाहिल नही हूँ मैं होगा गुरुर तेरे इश्क़ की दरिया पर तेरे दरिया का शाहिल नही हूँ मैं
माना हजार है आशिक है तेरे ।।

माना हजार है आशिक है तेरे पर उन हजारो में शामिल नही हूँ मैं तेरी दिखाई उस झूठ दुनिया की तरह Badhu..
इतनी आमिल नही हूँ मैं और क्या अफवाह उड़ाई है तूने की क्या तेरे काबिल नही हूँ मैं मेरी कदर उनसे पूछ जिन्हें हासिल नही हूँ मै

नींद तो आतीं है लेकिन रातो में अब ओ बात नही तू उम्र भर चाहेगा ऐसे मेरे ख्यालात नही और फिर बह जाऊँ मैं तेरे जजबातो में अब ऐसे मेरे ख्यालात नही ।।

पोछे थे आंसू जिससे …
पोछे थे आंसू जिससे तूने वो रुमाल आज भी मेरे पास है लाख shayari लिख लू तेरे लिए बेवफाई की लेकिन सच मान जाना तू आज भी उतना खास है
तू याद करता है ना जाने क्यों ये एहसास है उतार फेक ये नफरत का जो तूने पहना लिवाज है झुक रही हूँ शायरी के जरिये ।

झुक रही हूँ शायरी के जरिये मगर ये मत भूल तेरे सारे दिए हुए जख्मो का हिसाब है
लहजा बदला है मैंने लेकिन आज भी फितरत खुली किताब है रंगे इश्क़ चार दिन का हैं और तू गलत फैमि में जी रहा है की उत्ता उम्र सवाब है

उसने भी क्या खूब वफ़ा निभाई है ।।
उसने भी क्या खूब वफ़ा निभाई है शादी में अपने मेरे इन हाथो से मेहंदी लगवायी है दर्द बहोत था सीने में मैने भी उस दिन सबको झूठी मुशकुराहट दिखाई है हा मैंने उसकी दुल्हन अपने हाँथो से सजाई है

Poem And Shayari In Hindi 2020 

Poem in hindi – Love shayari |Love Poem

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अब प्यार नही तुझसे,
अब प्यार नही तुझसे मैं हर खुद को यही समझती हूँ ।
मलाल तो ये है सच जानकर भी क्यू अनजान रह जाती हूँ
अच्छ तो तुझे प्यार है मुझसे,
अच्छ तो तुझे प्यार है मुझसे तो मोहब्बत भी निभा पाओगे क्या ।

कुछ बता दूं अपने बारे में तुझे स्वाभिमानी हूँ मैं तुम मेरा अभिमान बन पाओगे क्या ।
अच्छ तो तुझे प्यार है मुझसे,
चलो छोड़ो ये बताओ दिन में दो पल निकाल मेरा हाल पता पूछ पाओगे क्या ।

प्यार है ना तुम्हे मुझसे तो बता दू मैं तुम्हे की टॉफी में चाकलेट टेड़ी नही मुझे इज्जत और वक्त दे पाओगे क्या ।
और मैं तो आकांक्षी हूँ मैं ,
मैं तो आकांक्षी हूँ मैं तुम मेरे आकांक्षा बन पाओगे क्या ।
अच्छ तो तुझे प्यार है मुझसे तो बताओ मेरे रूह से इश्क़ कर इसे अपने रंग में रंग जाओगे क्या ।

थोड़ी अपनी मनवा कर थोड़ी अपनी सुनकर.

थोड़ी अपनी मनवा कर थोड़ी अपनी सुनकर मेरे संग जिंदगी बिताओगे क्या ।

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क्या तुम भी मुझसे बिझड़ कर एक ढलती हुई साम हो गए थे
यानी दिखने में खूब सूरत और अंधेरे की ओर बढ़ रहे थे ।
क्या तुम्हे भी सब उस आफताब की तेज रोशनी के तरह चुभ रहा था

क्या मेरी कमी से तुम्हारा भी मन मचल रहा था ।
क्या तुमने भी कभी लौटने की कोसिश की थी
क्या देख मेरी तस्वीर बीते हुए पालो पर रोशनी की थी ।

आशुओ को झुपाकर नींद न पूरी होने का बहाना बनाकर
आशुओ को झुपाकर नींद न पूरी होने का बहाना बनाकर
तीरगी में जिस्म से हंजु बहाकर क्या तुमने भी मुझे पुकारने की कोशिश की थी ।

क्या तुम भी खुद से गुन गुनाते थे बाते हम दोनो की आईने में देख देखकर जाते थे
क्या तुम भी मुझसे बिछड़ कर एक ढलती हुई शाम से हो गए थे
यानी दिखने में खूब सूरत और अंधेरे की ओर बढ़ रहे थे
● की अग्यार ही बनना था
अग्यार ही बनना था तो प्यार क्यों बने मेरे असरार मेरे प्यार क्यों बने ◆

Poem on father

लक्ष्य तुम्हारे आज भी संभाल रखे है
तू बस इतना बता मेरे ख्यालो से जाने वाले ख्याल क्यू बने
=एक बार तो सोच लिया होता मुझे रुलाने से पहले
एक बार तो सोच लिया होता मुझे रुलाने से पहले =

जो आंखे चूमते थे कभी तुम उन्हें इस तरह भिगाने से पहले ।
एक बार तो सोच लिया होता मुझे रुलाने से पहले जो जान जान कहकर पुकारते थे तुम उसी की जान इस कदर निकालने से पहलेे.
एक बार तो सोच लिया होता मुझे रुलाने से पहले

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  1. Love Romantic shayari in hindi click here
  2. Super ser and shayari 
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Poem on father – Best Love Poem

Poem on father

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मुझे गौर से देखो मुझमे वो जरूर नजर आएगा ।

की मुझे गौर से देखो मुझमे वो जरूर नजर आएगा परछाई अंधेरो में साथ छोड़ देगी वो मेरे साथ पाताल में भी आएगा

है एक सख्स है जो बात जब मुझपर आ जायेगी तो वो अपना सब कुछ दाव पर लगायेगा मेरा पिता मेरे लिए खुदा से लड़ जायेगा ।
मैं रोता हूँ वो हसा देता है मैं रूठता हूँ वो मना लेता है
ना जाने किस मिट्टी का बना है ये पिता
जो हर दर्द छूपाकर अपने सीने में पूरे परिवार के सामने मुस्कुरा देता है

  1. Poem Love

मुझे लिखना नही आता मैं बस कलम चला देता हूँ
फिर कुछ देर रुक के उन शब्दों को गुन गुना देता हूँ
महकती खुश्बू इन पन्नो की मुझे इनका दीवाना बना देती है
इनपे दौड़ने की मेरी कलम हर वक्त बेताब सी रहती है

जब शब्द नही मिलते तो मैं उन्हें ढूढ़ कर लाता हूँ
ना हो कोई सुनने वाला मुझे मैं खुद को सुनाता हूँ
जो कहते है मुझे तुझमे कोई बात नही उन्हें मैं अपनी सारी बात बताता हूँ

बहोत पीछे है मुझसे मैं उन्हें इस बात का यहसास दिलाता हूँ
मेरी कविताओ में अल्फ़ाज़ जरूर कम होंगे मगर जजबात बहोत ज्यादा मौत आएगी जिस दिन मेरी आंखे जरूर कम होंगी मगर आँसू बहोत ज्यादा मैं कवि हूँ साहब मुझे लड़ना

नही आता हार मंजूर है मगर मैं हाथ नही उठाता ।
दम बहोत है हाँथो में की मैं लिखता बहोत हूँ ।
दर्द बहोत है दिल मे की मैं शाका नही हूँ ।
मैं अब नसा नही करता की वो काम नही आता ज्यादा आता है याद तो लिखा नही जाता ।

Poem on father in hindi

Poem on love

बार बार तेरे पास आकर मनाना मैं भी नही चाहता
खता बस इतनी है की दिल को रोका नही जाता ।
वैसे तो हर हुक्म मान लेता हूँ मैं मगर ये हुक्म तो सुना भी नही जाता
बहोत दुख है जिसे देखे बिना रहा नही जाता वो हमें देखना भी नही चाहता ।

कोशिस बहोत करता हू बीते लम्हे बुलाने की पर वो हो नही पाता ना जाने कितना डसकर बैठा है मेरे अंदर ।
की तुझे खुद से अलग किया नही जाता ।
मैं महीनों से समझा रहा हूँ खुद को मगर मुझे समझ मे नही आता ।

क्या मिलेगा तेरी मोहब्बत से जो तुझे बुला नही पाता ।
मैं बाहर से हसकर अंदर से रोता हूँ तुझे क्या पता की मैं तुझसे दूर कैसे रहता हूँ ।

तुझे लगता होगा कि मैं सब भूल गया ।
मैं तेरा सिवा सब भूल गया ।

कीमत घट गई मेरे खून की जो उसने खुद को तुझसे किसी बेवफा का नाम बना लिया मैं यहां तुझे बुलाने की कोशिस में था मेरे पीठ पीछे उसने तुझे खुद बसा लिया ।

हैरान हूं कि अब रग रग में है तू मैं कहा कहा से निकालू जिसे एक दौर में इतना चाह लिया
उसे मैं एक पल में कैसे भुला दू .

तू नजर आता है लम्हे लम्हे में मुझे मैं तेरी वो खूब सूरत सी तस्वीर दिल से कैसे निकालू । रूह और जिस्म में इस कदर बसा है तू की डर लगता है तुझे बुलाने की कोशिस में मैं खुद को ना मिटा दू ।

तू मानेगा नही पर तेरे जाने के बाद मेरे दिल का हाल बुरा है ।
उन शराब की बोतलों की दम पर ये दीवाना जी रहा है ।
मालूम होता है औरो से की तुझे कोई और पसंद है ।
ये बात मुझे उस दिन कहानी थी जिस दिन मैने कहा था मुझे तू पसंद है ।

जान ले एक बात की एहमित हम जैसा कोई दे नही पायेगा ।
तेरे आँसुओ की कीमत हमसे बेहतर कोई समझ नही पायेगा ।

हमसा आशिक तुझे उम्र भर मिल नही पायेगा क्योंकि हमने तुझे चाहा । सिर्फ तुझे चाहने के लिए जिस्म की नुमायित हम ताबयब से कर लेते ।

Top 5 Poem on Fother in hindi