Poem in urdu

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Poem urdu mein

मंजिल भी कही बिच में ही छूट गयी
कसती मेरी साहिल पर आके डूब गई और बड़ी मोहब्बत से दी थी तस्वीर उसने जबबघुमनी आके मुझसे टूट गयी
और एक मुद्दत बात ही सही पर उसकी मुलाकात नसीब हो
इन खाली हाँथो को उसका हाथ नसीब हो

उसको देखते देखते गुजर जाए उमर सारी
उसको देखते देखते गुजर जाए उम्र सारी
या खुदा एक मुखतर सी रात नसीब हो
मेरे बाद भी तुम खुद को सवारा करना उलझे तुम्हारी जुल्फे तो सुलझाया करना
और इतनी सी इल्तजा और है मेरी तुमसे
जब कभी मेरे दिल मे ख्याल हो तो ख्वाबो में चले आया करना

कोई उलझे जो तुमसे उसे प्यार से समझाया करना
अपनी उदासी भी सब मे मिलकर मनाया करना
और कभी मेरे महफ़िल में मेरा ख्याल तुम तक आये तो बहोत हस उन आंखों से पानी बहाया करना

Poem urdu mein 

मुमकिन है कि तुम जल्द ही किसी और कि हो जाओ
मुमकिन है कि तुम जल्द ही किसी और कि हो जाओ
उसकी साथ अपनी जिंदगी खुसी से बिताया करना और जब तुम्हारी जिंदगी में कोई नन्ही सी जान बन कर आये
मैं भी बस कर रहा हूँ क्यों अपना वक्त जाया कर रहा हूँ

मैं भी कर रहा हूँ इस दुनिया मे अपनी वक़्त जाया
अगर मुकिन हो तो किसी रोज मिलने आया करना
और फासले है इतनी दरमियां मगर इतने भी नही अगर कभी परेशान हो बताया करना

है कोई बात उनमे जो कभी भूले नही जाते
की है कोई बात उनमे जो कभी भूले नही जाते हम भी उनकी गली अब उतना नही जाते राह गुजर पर चुपके से देखते है उनको पर उनको देख कर हम वही रुक नही जाते
हर सुबह वही हर साम वही
हर सुबह वही हर साम वही मेरे हर साज का अंदाज वही
सब कुछ है मेरे पास ,, मगर कुछ भी नही है क्या हसीन वक्त होता जो मेरी साथ होते वही

Poems

की ओ जो पंछी था मेरा ओ कब की उड़ गई
नया एक आसिया भी उसको मिल गया कब का
अब किसी और दरक पर चहकता है अब वह किसी और छाह पर चलता है
किसी और कि बांतो से लेता है वह गजा अपनी
शायद वह किसी और में अपनी मोहब्बत देखता है उसको एक नया जहाँ भी मिलना जरूरी था ओ जैसे मेरे लिए है कोई उसके लिए भी था

था तमाम आसमान उड़ने का उसका
था तमाम आसमान उड़ने के लिए उसका मेरे उड़ने के लिये उसका फकत दीदार जरूरी था
अब उसको वापस भी बुलाये तो बुलाये किस लिए
उसके सामने हम आये तो आये किस लिए
की वो आसमान में उड़कर देखता तो मेरी हालत वो मेरे पास जमीन पर आए तो आये तो किस लिए
अब वो जहां है खुस उसे वही ही खुस रहने दो
मैं जहाँ हूँ खुस मुझे वही रहने दो अब उसका जिक्र कहि और नही करूँगा ये आखिरी नज्म उसके नाम रहने दो

Poem urdu mein 


Virendra Kumar

Hii . Friends - My Name Is Virendra Kumar .I am a poet|YouTuber|Blogger.

2 Comments

Askfilter · March 25, 2020 at 11:06 am

Nice poem thankyu sir

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