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गलती मेरी ना होने पर भी माफी अक्सर मैं ही मांग लिया करती thi
गलती मेरी ना होने पर भी माफी अक्सर मैं ही मांग लिया करती थी  मैं खुद को नाराज कर उन्हें मनालिया करती थी
की तेरे मैसेज का इंतजार करते रहना तेरे नाम से मेरे फ़ोन जब रिंग बजे तो साथ ही मेरे दिल का जोरो से धड़कना
गुजरो जब भी तुम इन आंखों से सामने से तो नजरे तुमपर आकर ही रुक जाना
तुम्हारा मेरे देख के मुस्कुरा जाने से मानो मेरे दिल का था बन जाना
तुम्हारे चेहरे की उदासी मुझे देखकर मेरे दिल का तुमसे बात करने के लिए तड़पना

हाँ सायद मुझे भी तुमसे प्यार था पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते थे

क्योंकि हर छोटी छोटी बातों को पूरे ध्यान से सुनना
उनकी कहि गयी मुझसे प्यार भरी लाइन को दिन सौ बार रटना
और जब फिर उनका ये कह देने से की तुम मुझे नही समझते
तुम मेरे प्यार को नही समझते तुझसे कहना तो बहोत कुछ चाहता था ये दिल उनसे पर
फिर ये सोच कर की कही उन्हें कुछ दर्द ना पहोच जाए
अक्सर अपने जजबातो को दिल मे बसा लिया करती थी
हाँ सायद मैं भी उनसे प्यार करती थी
पर वैसा नही जैसे वो किये करते थे

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अब कुछ इस कदर वो हमसे प्यार किया करते थे

पास आने तक नही देते थे पर दूर भी कहा जाने देते थे
वो मानते थे की हाँ माना मैं अक्सर रुठ कर चला जाया करता हूँ
क्युकी मुझे मनाने का तुम्हारा तरीका बेहद पसंद है  हाँ माना मैं अक्सर रुठ कर चला जाया करता हूँ क्योंकि मुझे रोकने का तुम्हारा तरीका बेहद पसंद है
अक्सर बेखयाली में मैं भी तुम्हारा ख्याल किया करता हूँ… जब मेरा भी दिल तुमसे बात करने के लिए तड़पता है लेकिन फिर ये सोच कर की तुम ही मुझे याद कर लोगी
अपने दिल को कही और मशरूफ कर लेता हूँ पर सायद मैं भी तुमसे प्यार किया करता हूँ
हाँ पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते हो

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की मुझे भी तुम्हारी फिक्र सताती है …
मुझे भी तुम्हारी फिक्र सताती है पर मैं फिक्र जता नही पाता हूँ पर तुम मुझसे दिल मत लगा बैठना …
तुम मुझसे दिल मत लगा बैठना दिल फेक आशिक हूँ मैं दिल तुम्हारा टूट ही जायेगा क्योकि ऐसी फिक्र मैं सभी के लिए जताता हूँ
पर हो सके तो मुझे कभी छोड़ कर मत जाना क्योकि मुझे तुम्हारी जरूरत है और आखिर कल मुझे ऐसा प्यार करने वाला कहाँ मिलेगा हाँ शायद मैं भी तुमसे प्यार किया करता हूँ
हाँ पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते हो

हिंदी कविताएं

ये गम क्या दिल की आदत है – Nhi To
किसी से कुछ शिकायत है -नही तो
किसी के बिन किसी के याद के बिन जीने की हिम्मत है – नही तो
किसी सूरत पर अब दिल नही लगता हाँ
तो क्या कुछ दिनों से ये हालत है – नही तो
वो तुझे वफ़ा की उम्मीदें देकर तुझसे बेवफा हो गया तो क्या अब तेरा भी वफ़ा से भरोसा उठ गया – नही तो
वो रात तुम्हे गमो के अंधेरो में अकेला छोड़ किसी और के बाहों में सो गया
तो क्या अब उसकी रातो को उजाड़ने की तमन्ना है – नही तो
तो क्या अब भी उसकी खुशियो की दुआओं में उसकी सजदों में सर झुकाया करती हो – हाँ
तो क्या अब भी उसके वापस लौटने का इंतजार करती हो – नही तो
तो भीर उसे भुला कर उसे फिर मानकर उससे प्यार करने की चाहत है -नही तो

  • Love poems in Hindi 2020


Virendra Kumar

Hii . Friends - My Name Is Virendra Kumar .I am a poet|YouTuber|Blogger.

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